Indian Paintings is one of the most delicate forms of art giving expression to human thoughts and feelings through the media of line and color. Many thousands of years before the dawn of history, when the man was only a cave dweller, he painted his rock shelters to satisfy his aesthetic sensitivity and creative urges.
Among Indians, the love of color and design is so deeply ingrained that they created paintings and drawings even during the earliest periods of history for which we have no direct evidence.

1. TANJORE ART (Thanjavuru Paintings)

  • Tanjore Paintings are better known as ‘Religious paintings with a royal heritage’.
  • Paintings depict that spirituality is the essence of creative work.
  • The subjects of these paintings are:
    • Hindu gods, goddesses, and saints
    • Episodes from Hindu Puranas and other religious texts
    • Instances of Jain, Sikh, and Muslims
  • The main figure or figures are placed in the central section of the plank.
  • In local parlance, these Paintings are called palagai padam – palagai means “wooden plank”; padam means “picture”.
  • Major notable features are their brilliant colour schemes, decorative jewellery with precious and semi-precious stones and cut glasses and remarkable gold leaf work, which you can see in the image.
  • The Wall Paintings in the Brihadeeswara Temple is one example.
  • These paintings received Geographic Indication (GI Tag) in 2008. 

तंजौर कला (तंजावुर चित्रकला)

  • यह कला रूप चोल साम्राज्य के शासन के दौरान विकसित हुआ तथा क्रमिक शासकों विजयनगर, नायक और मराठों के संरक्षण में और विकसित हुआ और फलाफूला।
  • चित्रकला को ‘एक शाही विरासत के साथ धार्मिक चित्रकला’के रूप में भी जाना जाता है।
  • चित्रकला दर्शाती है कि आध्यात्मिकता रचनात्मक कार्य का सार है।
  • इस चित्रकला के विषय निम्‍न हैं:
    • हिंदू देवी-देवता, और संत
    • हिंदू पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों से एपिसोड
    • जैन, सिक्‍ख और मुसलमानों के उदाहरण
  • मुख्य आकृति या आकृतियों को तख़्त के मध्य भाग में रखा गया है।
  • स्थानीय भाषा में, इस चित्रकला को पालगई पदम (पालगई = “लकड़ी का तख़्ता”; पदम = “चित्र”) कहा जाता है।
  • प्रमुख उल्लेखनीय विशेषताएं हैं उनकी शानदार रंग योजनाएं, कीमती और अर्ध-कीमती पत्थरों सहित सजावटी आभूषण तथा कट ग्लास और उल्लेखनीय स्‍वर्ण पत्‍तर का काम।
  • इस चित्रकला को 2008 में जीआई टैग प्राप्त हुआ है।

2. Madhubani Painting (Mithila Art)

Madhubani Painting, also known as Mithila art, is a style of Indian painting practised in the Mithila region of Bihar.

Key Features of Madhubani Painting

  • Madhubani paintings use two-dimensional art. It was traditionally a mural art or painting i.e. painting work is done on freshly plastered or a mud wall. But nowadays it is practised on cloth, paper and canvas also. 
  • Madhubani Painting mostly depicts people and their association with nature and scenes and deities from the ancient epics such as Krishna, Rama, Siva, Durga, Lakshmi, Saraswati, Sun and Moon, Tulasi plant. And secular features like court scenes, wedding scenes, social life etc.
  • The Madhubani paintings are famous due to their tribal motifs and use of bright earthy colours derived from plants or natural sources:
    • The green colour is extracted from the leaves of the wood apple tree;
    • Black colour from mixing soot with cow dung;
    • Yellow is derived from turmeric and the milk of banyan leaves;
    • The blue colour is sourced from indigo;
    • The red colour from the red sandalwood or kusam flower juice;
    • White from rice powder;
    • Orange from palasha flowers.
  • The other major significant features are that the colours are applied flat with no shading and no space is left empty (empty space is filled with flowers, animals, birds and geographic patterns).
  • Madhubani art has five distinctive styles:
    • Bharni
    • Kachni
    • Tantrik
    • Godna &
    • Kohbar
  • The Art (Madhubani painting) has become a global art and also received a GI (Geographical Indication) status.

मधुबनी चित्रकला (मिथिला कला)

  • मधुबनी चित्रकला, जिसे मिथिला कला भी कहा जाता है, बिहार के मिथिला क्षेत्र में प्रचलित भारतीय चित्रकला की एक शैली है।

मधुबनी चित्रकला की मुख्‍य विशेषताएं:

  • मधुबनी चित्रकला में दो आयामी कला का उपयोग किया जाता है। यह पारंपरिक रूप से एक भित्ति कला या चित्रकला थी अर्थात् चित्रकला का काम नई पलस्तर की गई या मिट्टी की दीवार पर किया जाता है। लेकिन आजकल यह कपड़ेकागज और कैनवास पर भी प्रचलित है।
  • मधुबनी चित्रकला में अधिकांश कृष्णरामशिवदुर्गालक्ष्मीसरस्वतीसूर्य और चंद्रमातुलसी के पौधे जैसे प्राचीन महाकाव्यों के दृश्यों और देवताओं तथा प्रकृति के साथ लोगों और उनके जुड़ाव को दर्शाया गया है। तथा धर्मनिरपेक्ष विशेषताएं जैसे अदालत के दृश्य, शादी के दृश्य, सामाजिक जीवन आदि।
  • मधुबनी चित्रकला अपने आदिवासी रूपांकनों तथा पौधों या प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त चमकदार मिट्टी के रंगों के उपयोग के कारण प्रसिद्ध हैं:
    • बेल की पत्तियों से हरा रंग निकाला जाता है;
    • गाय के गोबर के साथ कालिख मिलाने से काला रंग;
    • पीला रंग हल्दी और बरगद के पत्तों के दूध से निकाला जाता है;
    • नील का पौधा नीला रंग का स्रोत है;
    • लाल चंदन या कुसुम के फूलों के रस से लाल रंग;
    • चावल के पाउडर से सफेद रंग;
    • पलाश के फूलों से नारंगी रंग।
  • अन्य प्रमुख विशेषताएं यह हैं कि रंगों को बिना किसी शैडिंग के फ्लैट लगाया जाता है और कोई स्थान खाली नहीं छोड़ा जाता है (खाली जगह फूलों, जानवरों, पक्षियों और भौगोलिक पैटर्न से भरी होती है)।
  • मधुबनी कला की पाँच विशिष्ट शैलियाँ हैं:
    • भरनी
    • काछनी
    • तांत्रिक
    • गोदना एवं
    • कोहबर
  • यह कला (मधुबनी चित्रकला) एक वैश्विक कला बन गई है और इसे जीआई (भौगोलिक संकेत) का दर्जा भी प्राप्‍त है।

3. WARLI PAINTING

  • Warli folk paintings originated from Maharastra.
  • Warli is a largest tribe near Mumbai.

Key Features of Warli Painting Art

  • Warli painting (simply, Warli) is the vivid expression of daily and social events of the Warli tribe embellished on the walls of village houses.
  • The paintings do not depict mythological characters or images of deities.
  • They are painted on mud walls mostly using one color (white sourced from rice powder) and occasionally yellow and red
  • Warli paintings show striking similarity with pre-historic cave paintings in execution and usually depict scenes of human figures engaged in activities like hunting, dancing, sowing, and harvesting.
  • Warli paintings represent Palghat, the marriage god, often include a horse used by the bride and groom.
  • These paintings serve the social and religious aspirations of local people who believe that these paintings invoke the powers of the Gods.
  • Gradually new features seep into the art form with changes in the market. Today, they are painted on cloth, paper, and wooden plank as well.

वारली चित्रकला

  • वारली लोक चित्रकला की उत्पत्ति महाराष्ट्र से हुई है।
  • वारली मुंबई के निकट एक सबसे बड़ी जनजाति को संदर्भित करता है।

मुख्‍य विशेषताएं

  • वारली चित्रकला (साधारण, वारली) गांव के घरों की दीवारों पर अलंकृत वारली जनजाति की दैनिक और सामाजिक कार्यक्रमों की विशद अभिव्यक्ति है।
  • चित्रकला में पौराणिक पात्रों या देवताओं की छवियों को चित्रित नहीं किया गया है।
  • ये ज्यादातर एक रंग (चावल के पाउडर से सफेद रंग) और कभी-कभी पीले और लाल रंग का उपयोग करके मिट्टी की दीवारों पर चित्रित की जाती हैं।
  • वारली चित्रकला पूर्व-ऐतिहासिक गुफा चित्रकला के निष्पादन में असाधारण समानता को दर्शाती है तथा इसमें आमतौर पर शिकारनृत्यबुवाई और कटाई जैसी गतिविधियों में संलग्‍न मानव आकृतियों के दृश्यों को चित्रित किया जाता है।
  • वारली चित्रकला, पालघाट का प्रतिनिधित्व करती है, जिसमें शादी के देवता, अक्सर दूल्हा और दुल्हन द्वारा उपयोग किया जाने वाला घोड़ा शामिल होता है।
  • ये चित्रकला स्थानीय लोगों की सामाजिक और धार्मिक आकांक्षाओं को पूरा करती हैं, जो मानते हैं कि ये चित्रकला देवताओं की शक्तियों का आह्वान करती हैं।
  • धीरे-धीरे नई सुविधाएँ बाजार में परिवर्तन के साथ कला रूप में विकसित होती हैं।आज, ये कपड़े, कागज और साथ ही लकड़ी के तख़्त पर भी चित्रित होती हैं।

4. Pattachitra Painting

  • Pattachitra style of painting is one of the most popular and oldest art forms of Odisha. 
  • Patta, meaning canvas, and Chitra, meaning picture. It means painting on a canvas.
  • The paintings are manifested by rich colorful application, creative motifs and designs, and portrayal of simple themes, majorly mythological.
  • Popular themes depicted in the art form are:
    • Thia Badhia – depiction of the Jagannath temple;
    • Krishna Lila – presentation of Lord Krishna displaying his powers as a child;
    • Dasabatara Patti – the ten avatars of Lord Vishnu;
    • Panchamukhi – representing Lord Ganesh as a five-headed deity.
  • One of the significant features is the depiction of stark emotional expressions.
  • Presently, the chitrakars (painters) have painted on tussar silk and palm leaves, and even created wall hangings and showpieces.
  • The chitrakars use naturally available raw materials to bring about indigenous paints.

पट्टचित्र चित्रकारी

  • चित्रकारी की पट्टाचित्र शैली ओडिशा के सबसे लोकप्रिय और सबसे पुराने कला रूपों में से एक है।
  • पट्टा, का अर्थ कैनवास (चित्रफलक), और चित्र का अर्थ चित्र या चित्रकला होता हैं। इसका अर्थ है एक कैनवास पर चित्रकला।
  • चित्रों में अनेक रंगों का उपयोगरचनात्मक रूपांकनों और बनावटऔर सरल विषयों के चित्रणजो प्रमुख रूप से पौराणिक कथाओं से होते हैं, बनाएं जाते हैं।
  • कला के रूप में चित्रित लोकप्रिय विषय हैं:
    • थिया बधिया – जगन्नाथ मंदिर का चित्रण;
    • कृष्ण लीला – एक बच्चे के रूप में अपनी शक्तियों को प्रदर्शित करने वाली भगवान कृष्ण की प्रस्तुति;
    • दशाबतार पट्टी – भगवान विष्णु के दस अवतार;
    • पंचमुखी – भगवान गणेश का पांच मुख वाले देवता के रूप की प्रस्तुति।
  • इस कला की महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक निरी भावनात्मक अभिव्यक्तियों का चित्रण है।
  • वर्तमान में, चित्रकारों (चित्रकारों) ने तुषार रेशम और ताड़ के पत्तों पर चित्रित किया है, और यहां तक कि दीवार के पर्दे और प्रदर्शन-वस्तु भी बनाए हैं।
  • स्वदेशी पेंट को लाने के लिए चित्रकार प्राकृतिक रूप से उपलब्ध कच्चे माल का उपयोग करते हैं।

5. Kalamkari

  • Kalamkaris used to be known as Pattachitra.
  • The word Kalamkari was derived from the words: “kalam” means “pen” in Telugu, and “Kari” means “craftsmanship”.
  • Kalamkari refers to the making of any cotton fabric patterned through the medium of vegetable dyes by free-hand and block-printing.
  • This art became popular under the patronage of the Golconda sultanate.

Features of Kalamkari

The art is practised by many families in Andhra Pradesh, some pockets in Tamil Nadu.

Kalamkari | Indian Painting
  • The chitrakars (painters) paint on fabric and fabric scrolls etc. using vegetable dyes and contours are carved with bamboo or date palm stick.
  • Dyes for the cloth are extracted from various roots, leaves, and mineral salts of iron, tin, copper, and alum.
  • Kalamkari depicts the episodes of Hindu mythology such as the Ramayana or Mahabharata and iconography, similar to Buddhist Thangka paintings.
  • However, in recent times, they depict Buddha and Buddhist art forms, and many aesthetically good figures such as musical instruments, small animals, flowers, Buddha, and few Hindu symbols, like swastika are also introduced.
  • Kalamkari dupattas and blouse cloth are popular among Indian women.
  • Presently, silk, mulmul, cotton, and synthetic sarees are also sold with Kalamkari print. 

6. Rajasthani Miniature Painting

The Miniature painting was introduced to India by the Mughals. Miniature paintings are small (very small compared to life-size) colourful handmade paintings. The Rajasthani Miniature Painting is influenced by the royal and romantic lives of Mughal.

Feature of Rajasthani Miniature Painting

  • The miniature artists paint on paper, ivory panels, wooden tablets, leather, marble, cloth, and walls.
  • The colors are prepared from minerals and vegetables, precious stones, as well as pure silver and gold.
  • The paintings reflect the aristocratic, individualistic life with luxurious court scenes and hunting expedition of royalty, etc.
Miniature Painting | Indian Paintings
  • Flowers and animals are also depicted in these paintings.
  • Several schools of painting were evolved such as:
    • Mewar (Udaipur),
    • Bundi,
    • Kotah,
    • Marwar (Jodhpur),
    • Bikaner,
    • Jaipur, &
    • Kishangarh

Kishangarh Miniature Painting (or) Bani Thani paintings

  • The Kishangarh region in Rajasthan is famous for Bani Thani paintings. This school of painting reached its peak during Raja Sawant Singh.
Kishangarh Miniature Painting (or) Bani Thani paintings | Indian Paintings
  • Key Features of Kishangarh School of Painting:
    • It is a unique style with highly exaggerated features like long necks, large, almond-shaped eyes, and long fingers.
    • This school of painting beautifully depicts Radha and Krishna as divine lovers.
    • The other themes include portraits, court scenes, music parties, dancing, hunting, nauka vihar(lovers travelling in a boat), Krishna LilaBhagavata Purana 
    • Also portraits the festivals like Holi, Dussehra, Diwali, and Durga puja.

राजस्थानी लघु चित्रकारी

भारत में मुगलों द्वारा लघु चित्रकला की शुरुआत की गई थी। लघु चित्र छोटे (जीवित-आकार की तुलना में बहुत छोटे) रंगीन हस्तनिर्मित चित्र होते हैं। राजस्थानी लघु चित्रकारी मुगल के शाही और प्रेम प्रसंगयुक्त जीवन से प्रभावित है।

राजस्थानी लघु चित्रकारी की प्रमुख विशेषताएं हैं

  • लघु चित्रकारी के कलाकार कागज, हाथी दांत के पैनल, लकड़ी की गोलों, चमड़े, संगमरमर, कपड़े और दीवारों पर चित्रकारी करते हैं।
  • रंग खनिजों और सब्जियों, कीमती पत्थरों, साथ ही शुद्ध चांदी और सोने से तैयार किए जाते हैं।
  • चित्रों में शानदार कोर्ट दृश्यों के साथ अभिजात, व्यक्तिवादी जीवन और रॉयल्टी के शिकार अभियान आदि को दर्शाया गया है।
  • चित्रों में भव्य समाजिक जीवनआलीशान दरबारी दृश्यों के साथ व्यक्ति विशेष के जीवन और शाही लोगो के शिकार अभियान आदि शामिल हैं।
  • इन चित्रों में फूलों और जानवरों को भी चित्रित किया गया है।
  • चित्रकला के कई पंथ भी विकसित हुए हैं जैसे:
    • मेवाड़ (उदयपुर),
    • बूंदी,
    • कोताह,
    • मारवाड़ (जोधपुर),
    • बीकानेर,
    • जयपुर, और
    • किशनगढ़

किशनगढ़ लघु चित्रकारी (या) बनी-ठनी चित्रशैली

  • राजस्थान का किशनगढ़ क्षेत्र बनी-ठनी चित्रशैली के लिए प्रसिद्ध है। चित्रकला का यह पंथ/ सम्प्रदाय राजा सावंत सिंह के समय में अपने चरम पर पहुँच गया था।
  • किशनगढ़ चित्रकला शैली की मुख्य विशेषताएं:
    • यह लंबी गर्दनबड़ीबादाम के आकार की आंखों और लंबी उंगलियों जैसी अत्यधिक अतिरंजित विशेषताओं के साथ एक अनूठी शैली है।
    • चित्रकला की इस शैली में राधा और कृष्ण को दिव्य प्रेमियों के रूप में खूबसूरती से दर्शाया गया है।
    • अन्य विषयों में छायाचित्र, दरबार दृश्य, संगीत जश्न, नृत्य, शिकार, नौका विहार (नाव में यात्रा करने वाले प्रेमी), कृष्ण लीलाभागवत पुराण शामिल हैं
    • यह होलीदशहरादिवाली और दुर्गा पूजा जैसे त्योहारों को भी चित्रित करता है।

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